Essay on Diwali in Hindi

दिवाली पर निबंध आसान शब्दों में – Essay on Diwali in Hindi

रोशनी का भारतीय त्योहार दीवाली, दुनिया भर में सबसे व्यापक रूप से मनाए जाने (Essay on Diwali in Hindi) वाले धार्मिक अवसरों में से एक है। जबकि दीवाली भारत के कुछ त्योहारों में से एक है, जिसकी कोई क्षेत्रीय जड़ नहीं है और इसे पूरे देश में मनाया जाता है,

यह एक ऐसा त्योहार भी है, जिसके साथ कई कहानियां जुड़ी हुई हैं, क्योंकि इसे मनाने वाली विभिन्न परंपराओं और धर्मों की संख्या है। दिवाली के बारे में कुछ सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यहां दिए गए हैं जो आप शायद नहीं जानते।

भगवान राम, उनके भ्राता और सीता माता 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, इस खुशी में अयोध्यावासियों ने दीये जलाकर और सम्पूर्ण मार्ग को फूलो से सजाकर  उनका स्वागत किया था। श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध भी इसी दिन किया था और इसी  दिन भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस भी है और जानकारी हम  Essay on Diwali in Hindi में जानेंगे और आपको होली, रक्षाबंधन आदि त्योहरो के बारे में जनना हो तो अआप पढ़ सकते हो| 

दिवाली पर निबंध

प्रस्तावना

दिवाली का त्योहर सभी हिन्दू समाज के  लोगो क लिए उल्लाषपूर्ण और ख़ुशीयो का त्योहार होता है|               

यह त्योहार पांच दिनों तक बहुत खुशियों से मनाया जाता है। धनतेरस से भाई दूज तक यह त्योहार मनाया जाता  है।

परिवार के सभी सदस्य नए कपडे पहनते है  इस दिन। फुलझड़ी, पटाखे छोड़े जाते हैं। बच्चे इस त्यौहार का भरपूर आनद लेते है| 

दिवाली भारत में एक बहुत खुशी का अवसर है। इस गौरवशाली पर्व के रमणीय,सुंदरता और हर्षो उल्लाश का त्यौहार है। यह निश्चित रूप से दुनिया के सबसे महान त्योहारों में से एक है।

भारत में दिवाली

 भारत में दिवाली का बहुत बड़ा महत्व है | भारत के लोग इस त्यौहार को बहुत हर्षो उल्लास के साथ मानते है भारत में इस दिन मकानों दुकानों, बाजारो, सड़के आदि को दियों और लाइटो से सजा दिया जाता है| भारत में इस दिन चरो  तरफ खुशी का माहौल होता है सभी के चेहरों पर एक धीमी सी मुस्कान होती है|

दिवाली से पहले धनतेरस का त्यौहार आता है जिसमे सभी लोग कुछ ना कुछ खरीदने पर विस्वाश रखते है| अधिकतर लोग मानते है की इस दिन चांदी खरीदना शुभ होता है|

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दिवाली का महत्व

दिवाली को अक्सर “रोशनी का त्योहार” कहा जाता है। लोग मिट्टी के तेल के दीपक जलाते हैं और अपने घरों को विभिन्न रंगों और आकारों की रोशनी से सजाते हैं जो उनके प्रवेश द्वार और बाड़ पर चमकते हैं जो एक मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य बनाता है।

बच्चों को पटाखे फोड़ना जैसे फुलझड़ियाँ  चलना, रॉकेट से आतिशबाजी करना , फूलदान, फव्वारो से रोशनी का आनंद लेना , चपरास आदि बहुत पसंद होते हैं।

इस शुभ अवसर पर, लोगो द्वारा  देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है क्योंकि व्यापारी दिवाली पर नया बही खाता  खोलते हैं और इसके अलावा, लोगों का मानना है कि यह यह त्यौहार सभी के लिए धन, समृद्धि और सफलता लाता है। लोग अपने लिए नए कपडे, घरो में सजावट के सामान आदि लाते है | 

त्योहार के दौरान अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करने के लिए तत्पर रहते हैं। 

दीपावली का इतिहास

दीपावली का त्यौहार लोग बहुत पुराने समय से मना रहे है। इस त्यौहार का इतिहास अलग-अलग ईतिहासकार  भिन्न-भिन्न मानते हैं, लेकिन अधिकतर ईतिहासकारो का मानना है कि जब भगवान राम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे| 

तब अयोध्या वासियों ने उनके स्वागत के लिए घी के दीपकजलाकर उनका स्वागत किया था  और अयोध्या के हर रास्ते को सुनहरे फूलों से सजा दिया गया था| 

सिख धर्म के लोग भी इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। वे लोग त्यौहार को इसलिए मनाते है क्योंकि इसी दिन  अमृतसर में 1577ई. में स्वर्ण मन्दिर का पदन्यास हुआ था। साथ ही सिक्खों के 6th गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को भी इसी दिन ग्वालियर की जेल से जांहगीर द्वारा रिहा किया गया था|

आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द तथा प्रसिद्ध वेदान्ती स्वामी रामतीर्थ ने इसी दिन मोक्ष प्राप्त किया था। इस त्योहार का संबंध ऋतु परिवर्तन से भी है। इसी समय शरद ऋतु का आगमन लगभग हो जाता है| इसी कारण आज के दिन आर्य समाज के लोग इस दिन को बड़े हर्षो उल्लास के साथ मानते है|

महावीर का निर्वाण

एक और लोकप्रिय मान्यता जो भारत के छठे सबसे बड़े धर्म जैन धर्म के लिए दिवाली के अवसर को दर्शाती है, वह यह है कि यह वह दिन है जब 24 तीर्थंकरों (महान शिक्षक) में से अंतिम भगवान महावीर ने ‘निर्वाण’ प्राप्त किया था।

गुरु गोबिंद जी का ग्वालियर से भागना

जबकि दिवाली के आसपास की अधिकांश परंपराएं हजारों साल पीछे चली जाती हैं, इससे जुड़ी सबसे हालिया परंपराओं में से एक सिख धर्म में है। सिख दीवाली को उस अवसर के रूप में मनाते हैं जिस पर उनके शिक्षक गुरु हरगोबिंद जी को कई हिंदू राजाओं के साथ ग्वालियर में मुगल शासक जहांगीर की कैद से रिहा किया गया था।

पांच दिवसीय महायज्ञ

जबकि दक्षिण भारत दिवाली को एक दिवसीय उत्सव के रूप में मनाता है, उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्से इसे पांच दिवसीय उत्सव के रूप में मनाते हैं, प्रत्येक क्षेत्र का अपना महत्व है और प्रत्येक एक अलग देवता को समर्पित है।

बुराई पर अच्छाई की जीत

हालांकि भारत के दक्षिणी हिस्सों में, दीवाली (या दीपावली) को उस दिन के रूप में मनाया जाता है जिस दिन भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया और भूमि पर शांति लाए। किंवदंतियों के अनुसार, नरकासुर ने अपने अंतिम क्षणों में पश्चाताप किया और धरती माता से अनुरोध किया कि उनकी मृत्यु हर साल पूरे देश में रोशनी और रंगों के साथ मनाई जाए। एक ख़्वाहिश जो सहर्ष मंजूर हो गई।

शिवकाशी, भारत का पटाखा शहर

भारत की स्वतंत्रता और उसके बाद के आयात प्रतिबंधों के बाद, तमिलनाडु के दक्षिणी शहर शिवकाशी ने पूरे भारत के लिए पटाखा और माचिस बनाने वाली फैक्ट्री के रूप में प्रमुखता हासिल की। अपने चरम पर, शहर ने देश में सभी पटाखों की बिक्री में 90 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया।

स्वच्छता का प्रतीक

दिवाली खुशियों का त्योहार तो है ही साथ ही इसे स्वछता का प्रतिक भी मना जाता है|  इसलिए जैसे ही दिवाली आने वाली होति है तो घरो, दुकानों, सड़को अदि को साफ कर दिया जाता है| 

दीपावली त्योहार की तैयारियां दिवाली से कई दिनों पहले ही आरंभ  कर दी जाती है। दीपावली के कई दिनों पहले से ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने में जुट जाते हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि जो घर साफ-सुथरे होते हैं, उन घरों में दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी विराजमान होती हैं| 

अपना आशीर्वाद प्रदान करके वहां सुख-समृद्धि में बढ़ोत्तरी करती है। दिवाली के नजदीक आते ही लोग अपने घरों को दीपक और तरह-तरह के लाइट से सजाना शुरू कर देते हैं।

निष्कर्ष/उपसंहार

  दीपावली अपने अंदर के अंधकार को मिटा कर समूचे वातावरण को प्रकाशित  करने वका त्योहार है। बच्चे त्यौहार का आनंद लेके के लिए पटाखे, फुलझड़िया आदि द्वारा और आतिशबाजी का आनंद उठाते हैं।

हमें इस बात को समझना होगा कि दीपावली के त्योहार का अर्थ दीप, प्रेम, सुख-समृद्धि और धन समृद्धि  से है। दिवाली का त्योहार हमें हमेशा आगे बढ़ने और बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है।

 दीपावली का त्योहार सांस्कृतिक और सामाजिक सद्भाव, पप्रेम का प्रतीक है। इस त्योहार के कारण लोगों में आज भी सामाजिक एकता बनी हुई है। इस दिन सभी रिश्तेदार लोग आपस में मिलते है और रिस्ता बढाते है| 

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 दिवाली पर निबंध हिंदी में(Essay on Diwali in Hindi) हमने हिन्दू त्यौहार दिवाली के बारे में हमने सारी जानकारी हाशिल हो चुकी है|

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