essay on independence day in hindi

Essay On Independence Day in Hindi – स्वतंत्रता दिवस पर निबंध

Essay On Independence Day in Hindi दोस्तों आज हमने स्वतंत्रता दिवस पर निबंध लिखा है। यह पर्व हमारे देश में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है अक्सर बच्चो को स्कूल में स्वतंत्रता दिवस पर निबंध लिखने के लिए आप हमारे इस आर्टिकल की मदद ले सकते है। और साथ ही आप गणतंत्र दिवस पर निबंध भी पढ़ सकते है।

Short Essay On Independence Day in Hindi

राष्ट्रीय पर्व –
15 अगस्त , 1947 का दिन भारतवर्ष के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया है । 15 अगस्त भारतवर्ष का एक राष्ट्रीय त्यौहार है । भारत के करोड़ों नागरिक इस पर्व को ‘ स्वतंत्रता दिवस ‘ के रूप में बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं । यह दिन हमारे लिए राष्ट्रीय गौरव का दिन है । यह पर्व हम सभी के हृदयों में नवीन स्फूर्ति , नवीन आशा , उत्साह तथा देशभक्ति का संचार करता है ।

स्वतंत्रता दिवस का महोत्सव –
15 अगस्त को देश के प्रमुख स्थानों पर स्वतंत्रता के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष महोत्सव मनाया जाता है । प्रात : 8 बजे लगभग सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराया जाता है । विद्यालयों में ध्वजारोहण की रस्म एक दिन पहले ही कर ली जाती है । विद्यालयों में बच्चों को मिठाइयाँ भी बाँटी जाती हैं । यह महोत्सव भारत के सभी नगरों और गाँवों में मनाया जाता है । भारत की राजधानी दिल्ली में यह पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है । इस दिन देश के प्रधानमंत्री लालकिले पर तिरंगा झंडा लहराते हैं और जनसमूह के सामने भाषण देते हैं । यहाँ तीनों प्रकार – जल , स्थल तथा वायु सेनाओं की परेड़ होती है । प्रधानमंत्री जिस समय लालकिले पर तिरंगा लहराते हैं तब 31 तोपों से सलामी दी जाती है । बैंड पर राष्ट्रीय धुन बजायी जाती है । इस अवसर पर विदेशी राजपूत आदि भी उपस्थित होते हैं । विदेशों से बधाई सन्देश भी आते हैं । लालकिले पर एकत्रित अपार जनसमूह में एक अपार भवनों जैसे राष्ट्रपति भवन , लालकिला , संसद भवन आदि पर रोशनी की जाती है । अनेक स्थानों पर आतिशबाजी भी चलाई जाती है ।

उपसंहार –
यह स्वतंत्रता दिवस हमें इस बात की याद दिलाता है कि इतने बलिदान देकर जो आजादी हमने प्राप्त की है , उसकी रक्षा हमें हर कीमत पर करनी है । परन्तु यह बहुत कठिन कार्य है । आज देश में अनेक प्रकार की भयावह समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं । देश में फैली भ्रष्टाचार , महँगाई , रिश्वतखोरी , तस्करी जैसी समस्याओं से छुटकारा पाए बिना देश को वास्तविक रूप में स्वतंत्र नहीं कहा जा सकता है । अत : हमें मिलकर इस दिन राष्ट्र की स्वतंत्रता की रक्षा का प्रण लेना चाहिए।

Long Essay On Independence Day in Hindi

प्रस्तावना –

स्वतन्त्रता मनुष्य की स्वाभाविक वृत्ति है। अधम से अधम व्यक्ति और छोटे से छोटा बालक भी अपने ऊपर किसी का नियन्त्रण प्रसन्नता से स्वीकार नहीं करता। अंग्रेज भारत में आये और भारतीयों को परतन्वता के पाश में जकड़ लिया। गुलामी की जंजीरों में बंधे हुए भारतीय उसी दिन से उस जल को काटने के लिये अनवरत प्रयास करते रहे इस पुनीत संग्राम का श्रीगणेश झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के कर-कमलों से सन १८५७ में हुआ। तब से लेकर सन् १९४७ तक अनन्त माताओं की गोद से लाल, अनन्त पत्नियों के सौभाग्य सिन्दूर और अनन्त बहनों के भाई स्वतन्त्रता की बलिवेदी पर चढ़कर अमरगति को प्राप्त हुए। परिवार के परिवार इस पवित्र यज्ञ की अग्नि में भस्मसात् हो गये। क्रान्तिकारियों के घरों में दिन दहाड़े आग लगाई गई । उनके परिवार के व्यक्तियों को भूखा मारा गया, उनकी माँ, बहिनों की लज्जा लूटी गई । अंग्रेज अपनी प्रभुता की रक्षा के लिये, जो कुछ कर सकते थे, उन्होंने सब कुछ किया।

राष्ट्रीय पर्व का दिन –

प्रतिवर्ष प्रत्येक नगर में यह राष्ट्रीय पर्व बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। विद्यालय के छात्र अपने इस ऐतिहासिक उत्सव को बड़े उल्लास और उत्साह के साथ मनाते हैं। हमारे कॉलिज में भी अन्य वर्षों की भांति इस वर्ष भी यह उत्सव दुगुने उत्साह के साथ मनाया गया| उपा की लालिमा के उदय के साथ ही विद्यार्थी अपने अपने घरों से निकल पड़े और कॉलेज के प्रांगण में एकत्रित हुए। अध्यापकों ने अपनी-अपनी कक्षाओं की उपस्थिति ली, जिससे यह मालूम हो गया कि कौन-कौन नहीं आया है। बाद में भी विद्यार्थी घीरे-धीरे आते-जाते थे और अपनी-अपनी कक्षाओं की पंक्ति में खड़े हो जाते थे। विद्यार्थियों को ६ बजे का समय दिया गया था। अनी ६ बजने में दस मिनट शेष थे। समस्त कक्षाओं की उपस्थिति पूर्ण हो चुकी थी, जिन विद्यार्थियों को नारे लगाने के लिये एक दिन पहले चुन लिया गया था,

वे गगन-भेदी ध्वनि से कालज में ही खड़े होकर नारे लगा रहे थे। जैसे ही ६ बजे वैसे ही प्रधानाचार्य ने प्रभात फेरी में चलने के लिए विद्यार्थियों को संकेत दिया और हम तीन-तीन की पंक्ति बनाकर सड़क पर चलने लगे आगे वाले विद्यार्थी के हाथ में तिरंगा झण्डा था, उसके पीछे कॉलेज के विद्यार्थी तीन-तीन की पंक्तियों में चल रहे थे। नारे लगाने वाले विद्यार्थी नेता बड़े जोरों से नारे लगा रहे थे बीच में एक मधुर मार्चिंग गीत गाया जा रहा था, जिसे सभी छात्र बड़ी प्रसन्नता से दुहराते थे। इस प्रकार हम नगर के प्रमुख चौराहों पर होते हुए जिलाधीश की कोठी के सामने से निकले रास्ते में कई मन्दिर मिले, जिनमें घण्टे बज रहे थे, शंख ध्वनि हो रही थी। यह प्रार्थना इसलिए हो रही थी कि हमारी स्वतन्त्रता चिर-स्थायी रहे, इस आशय की एक सरकारी सूचना भी जनता में प्रसारित हुई थी। नगर में परिक्रमा लगाते हुए हम लोग कॉलेज पहुँचे, वहाँ नौकर झण्डियाँ लगा रहे थे। कॉलेज के मुख्य भवन पर तिरंगा झण्डा लगाया जा रहा था। झण्डा फहराने का समय ८ बजे का था, क्योंकि सभी सरकारी भवनों पर ८ बजे ध्वजारोहण का समय निश्चित किया गया था अभी ८ बजने में आधा घण्टा था, इसलिए हमें आधे घण्टे की छुट्टी मिल गई। जिन लड़कों के घर पास में थे वे अपने-अपने घरों में जल्दी लौट आने की इच्छा से जल्दी-जल्दी जाने लगे बाजार में स्थान-स्थान पर तोरण द्वार बने हुए थे, जिन पर स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख सेनानियों के नाम अंकित थे-किसी पर गाँधी द्वार तो किसी पर नेहरू द्वार।

ठीक आठ बजे प्रधानाचार्य ने ध्वजारोहण किया, हम सभी छात्रों ने झण्डे को सलामी दी। राज्य के शिक्षामन्त्री तथा शिक्षा-संचालक के सन्देश पढ़कर सुनाये गये। कुछ विद्यार्थियों ने अपने मधुर कण्ठ से राष्ट्रीय कविताओं का पाठ किया और अन्त में प्रधानाचार्य का एक सारगर्भित भाषण हुआ। १० बजे से विद्यार्थियों के खेल शुरू हुए । लम्बी कूद, ऊँची कूद, १०० मीटर से लेकर ८०० मीटर तक की दौड़, बाधा दौड़, गोला फेंकना, तश्तरी फेंकना, रस्से पर चढ़ना इत्यादि नाना प्रकार के खेलों में विद्यार्थी अपनी-अपनी रुचि से भाग लेने लगे। इस वर्ष एक और सुन्दर व्यवस्था कर दी गई थी कि विद्यार्थियों को तुरन्त पारितोषिक मिल रहा था। प्रथम आने वाले छात्र को एक बड़ा थाल, द्वितीय आने वाले को एक कलई का गिलास और तृतीय आने वाले को एक कटोरी मिल रही थी। थाल के प्रलोभन से मैने भी दौड़ में भाग लिया। जूनियर्स सीनियर्स के ग्रुप बने हुए थे। मुझे सीनियर्स में रखा गया क्योंकि मेरी आयु १६ साल से अधिक थी और साढ़े चार फीट से कद भी ज्यादा था। दौडा, बहुत कोशिश की परन्तु वहाँ तो घोड़े को भी मात देने वाले विद्यार्थी मौजूद थे, परिणाम यह हुआ कि प्रथम स्थान तो दूर रहा द्वितीय और तृतीय भी नहीं आया । थाल पाने की आशा मन की मन में ही रह गई।

हम लोग घर पहुंचे, खाना खाया, फिर कॉलेज की ओर चल दिये । रंगमंच तैयार था। चारों ओर बिजली के बल्बों से हॉल जगमगा रहा था। एक ओर महिलायें कुर्सियों पर बैठी हुई थीं, दूसरी ओर निर्मन्त्रित अतिथि । पृथ्वी पर बिछे हुए फर्शों पर छात्रों के बैठने का प्रबन्ध था। ‘चौराहा’ नामक एकांकी नाटक अभिनीत हुआ। दर्शक मन्त्र-मुग्ध होकर देख रहे थे, बीच-बीच में किसी अभिनेता का अभिनय अधिक पसन्द आ जाने पर तालियों की भी गड़गड़ाहट होती थी। अन्त में प्रधानाचार्य ने सभी आगन्तुकों को धन्यवाद देकर कार्यक्रम समाप्त किया। यह हमारा सौभाग्य है कि वर्षों की साधना के पश्चात् हमने स्वर्णिम अवसर प्राप्त किया है। हमारा कर्तव्य है कि हम इस राष्ट्रीय पर्व को उल्लास और उत्साह के साथ सदैव मनायें और देश की समृद्धि और देश की स्वतन्त्रता की रक्षा के लिये सदैव प्रयत्नशील रहें।

निष्कर्ष –

15 अगस्त को हर वश रास्ट्रय पर्व के रूप में मनाया जाता है। बड़ी कठनाईयो के बाद हमारे देश को आजादी मिली थी। इस दिन सभी स्कूल और सरकारी संस्थाओ में झंडा पहराया जाता है।  और सब आपस में एक दूसरे को धन्यवाद देते है और एक दूसरे का मुँह मीठा किया जाता है।

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