Holi Poem in Hindi

होली पर सर्वश्रेष्ठ कविताएं जो दिल को छू जाए – Poem On Holi In Hindi

Holi Poem In Hindi दोस्तों आज हमने होली पर कविता लिखी है होली को रंगो का त्यौहार कहा जाता है। होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत को  याद करने के लिए मनाया जाता है। इसलिए हमने बच्चो की साहयता के लिए होली पर कविता लिखी है, क्योकि अक्सर बच्चो को विधालय में कविताएं लिखवाते है।

Best Poem On Holi In Hindi 

बड़ा ये शुभदिन आया है
रंगो ने अपना जाल फैलाया
दिल में भरकर उमंग सभी ने
दुश्मनो को भी गले लगाया है।
चारो तरफ है खुशियाँ फैली
मानो किसी ने मुरली  बजाया है
फिर लगता है कान्हा ने वृन्दाबन मे
राधा को अपना रंग  लगाया है ।।
उत्सव ये बड़ा प्यारा
सबको इसने अपना बनाया
नाराजगी को भी खिलखिला  दे
होली की गजब सी
माया है ।।
होता रंग इसमें प्रेम का
मिन्नता अपनापन उल्लास का
जो भी रंग होली के रंगो मे
भलता अपना पल विलाप का।।
अनुभव ये नये अक्सर
हुमे प्रदान कर जाता है
कौन है राजा कौन है रंक
रंगो की चादर मे कहा समझा किसी को आता है ।।
बच्चों में उमंग जगाये
युवाओं में प्रेम सन्देश लाये
वथ भी हो व्याक्ति अगर
तो उसमे जीने का विशवास जगाये ॥
मानव को अक्सर इसने
मानवता सिखलाया है
भाईचारे का सही अर्थ है क्या
हमे हर बार बतलाया है ।

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 होली पर कविता

रंगो का त्योहार होली
मारो सब मिलकर पिचकारी
लाल गुलाल सबको रंगाए
सबका मन प्रफुल्लित हो जाए
बच्चे खेल खूब रंगों से
मारो पिचकारी दूर से
रंग बिरंगी होली ये
देखो कैसे खेले सब
कोई दूर भागता है
दूसरा पकड़कर लाता है
हसी माझाक का त्योहार ये
रंगो से सजी ये होली
हर गीले सिखवे मिटाता है
जीवन में रंग भरता है
खूब लाला पीले हो जाओ सारे
कुछ देर ही सही हर गम भुलाओ सारे
रंगो की शक्ति की पहचान
सबको याद दिलाओ प्यारे
घर घर का त्योहार है होली
रंगों का त्योहार है होली
रंगों का खजाना है होली
मिलकर मारो सारे पिचकारी।

Poem on Holi Festivals in Hindi

एक बार फिर होली आई है,
साथ ढेर सारी यादे लाई है।
याद आती है वो बचपन की होली,
गुब्बारों से जब खेला करते थे।
पिचकारियों में रंग भरा करते थे,
दोस्तों से रंगों पे झगड़ा करते थे।
याद आती है वो ठुमको वाली होली,
नाचते हुए जब झुमा करते थे,
ठहाके के संग जिया करते थे,
अपनों को भी रंग लगवाया करते थे।
याद आती है वो पकवानों वाली होली,
गुजियों की थाली को देखा करते थे,
पेट भर के जब खाया करते थे,
गरीबों को भी खिलाया करते थे।
याद आती है वो बचपन वाली होली,
दिल से जब जिया करते थे।

Short Poem On Holi 

बसंत की शोभा बढ़ाने
देखो बच्चो होली आई
रंगों की बोचार के संग
खुशियों के दिन है लाई
होली आई होली आई
सर्दी में जो ठिठुर रहे थे
खेल रहे हैं पानी में
ठंड को दूर भागने
रूठे अपनो को मानने
होली आई होली आई
दौड़ रहे हैं भाग रहे हैं
सबको एक ही रंग रहे हैं
रंगों की बहार लिए
होली आई होली आई
Happy Holi

Holi ke Tyohar Par Kavita 

हरे रंग से रंग रहे है सब गौरी का गाल,
जिसने रंगा तड़प उठा, जो ना रंगा बेहाल ,,
बेठ के माही याद कर रहे एक पुरानी याद,,
जब रंगा था गाल गुलाबी हमने पिछले साल,,
उस होली पर रंगा था जिसने सबसे पहले गाल
वो बैरी अब बदल गया है नही पूछता हाल,,
उसके पिया ने छुआ होगा उसको अबके साल,
उसके हाथ तो झूमे होंगे छु के उसके गाल|

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