padarth kise kahate hain

पदार्थ की परिभाषा , भेद और लक्षण – Padarth Kise Kahate Hain

दोस्तों आज मैं आपको Padarth Kise Kahate Hain के लेख में विज्ञान से संबंधित कुछ टॉपिक के बारे में जानकारी दूंगा जैसे कि आज मेरा लेख का मुख्य टॉपिक है पदार्थ मैं आपको अपने लेख में पदार्थ की परिभाषा इसके प्रकार के बारे में संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश करूंगा

पदार्थ की परिभाषा(Padarth Kise Kahate Hain)

पदार्थ स्थान देता है और उसके द्रव्यमान भी होते हैं वे वस्तु जो स्थान घेरती हो और द्रव्यमान भी होता है और जिन का अनुभव हम ज्ञानेंद्र द्वारा कर सकेंगे पदार्थ कहलाते हैं जैसे – पानी , हवा , पत्थर , बस , कार इत्यादि।

पदार्थ के लक्षण(Padarth Ki Avastha)

  1. पदार्थ जगह घेर लेता है-सभी द्रव्य (ठोस, द्रव अथवा गैस) स्थान घेरती हैं द्रव्य से बनी हुई कोई भी वस्तु जितना स्थान देती है उसका आयतन कहते हैं आयतन द्रव्य का मूल लक्षण होता है।
  2. पदार्थ में जड़त्व –किसी भी पदार्थ से बनी हुई वस्तु पर कोई भी बाहरी बल नहीं लगाए बिना वस्तु की विराम अवस्था एवं एक समान गति की अवस्था परिवर्तन नहीं किया जाए पदार्थ की इस प्रवृत्ति को जड़त्व कहते हैं इसका माप द्रव्यमान में किया जाता है।
  3. गुरूत्वाकर्षण-पदार्थ में किन्हीं दो कारणों अथवा विंडो के बीच पारस्परिक आकर्षण का बल कार्यकर्ता हो जिसे गुरुत्वाकर्षण कहते हैं पदार्थ के किसी एक खंड द्वारा पदार्थ के किसी दूसरे खंड पर गुरुत्वाकर्षण बल आरोपित होता है। यह द्रवमान का मूल लक्षण है।

पदार्थ का वर्गीकरण(Padarth Kya Hai)

पदार्थ में उपस्थित अवयवों के आधार पर इन्हें दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है-
  • पदार्थ का भौतिक वगीकरण
  • पदार्थ का रासायनिक वगीकरण

पदार्थ का भौतिक वर्गीकरण(Padarth Ki Kitni Avastha Hoti Hai)

वर्गीकरण भौतिक अवस्था के आधार पर पदार्थों को तीन वर्गों में बांटा गया है।
ये तीन वर्ग हैं-
  1. ठोस (Solid)
  2. द्रव (Liquid)
  3. गैस (Gas)

ठोस (Solid)- ठोस पदार्थ व्यवस्था होती है जिसका आकार एवं आयतन निश्चित होते हैं। जैसे – कुर्सी, ईट ,पत्थर ,मूर्ति कलम ,तांबा।  जब पदार्थ के अणुओं में परस्पर आकर्षण बल प्रथक कारी वर्ल्ड से सफल होता हो तो पदार्थ ठोस अवस्था में रहेगा इस प्रकार ठोस पदार्थ के अनुप्रस्थ और आकर्षण बल सफल होता हो सबल आकर्षण बल के कारण ठोस पदार्थ के अनुकरण रूप से संकुचित हो जाते हैं। तथा उनकी स्थिति निश्चित हो जाती है। इस स्थितियों के इर्द-गिर्द दिए सिर्फ अपने आंतरिक अंतराल में कंपन करते होंगे। जब तक कि उन पर बाहर से कोई बल नहीं लगेगा इसी कारण ठोस पदार्थ के आकार का आयतन स्थित होते हैं। तो उसके कारण आपस में बहुत पास होते हैं इस कारण में उच्च घनत्व और पीड़ा होती है उसके कानों में उच्च क्रम में व्यवस्था को क्रिस्टल जालक कहते हैं इनकी एक ज्यामिति आकृति होती है।

द्रव (Liquid) – यह पदार्थ की व्यवस्था होती है जिसमें उसका आयतन निश्चित होता है लेकिन आकार नहीं जैसे दूध पानी देर शराब आदि द्रव्य पदार्थ की सभी स्थितियों के ऊपर किससे हमेशा समतल होती है जब पदार्थ को बहने वाला धर्म दिव्य पदार्थ में आकर्षण बल पृथक कार्य बल से कुछ ही सफल होता है तो पदार्थ द्रव अवस्था में रहेगा इस तरह द्रव पदार्थ के अणुओं के अंदर परस्पर आकर्षण बल ठोस अवस्था की अपेक्षा कम होता है इसी कारण द्रव पदार्थ के अणु कम करने और रूप से संकलित होते हैं तथा यह गति करने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं परंतु यह अनु पदार्थ के अंदर ही इधर-उधर गति करेंगे दर्द पदार्थ के अनुरूप पदार्थ की अनुज की अपेक्षा दूर दूर होते हैं फिर भी इनके बीच की दूरी बहुत अधिक नहीं होगी। आकर आसानी से बदल लेता है परंतु उनका आयतन नहीं बदलता वह सामान रहता है इसीलिए पदार्थ का आयतन निश्चित और आकर्षित होता है।

गैस (Gas) – यह पदार्थ की वह अवस्था होती है जिसमें उसका आकार आयतन दोनों अनिश्चित होते हैं यह बर्तन या स्थान के आकार के अनुसार अपना आकार और आयतन बदल लेता है जैसे वायु हाइड्रोजन नाइट्रोजन ऑक्सीजन आदि गैस अवस्था में पदार्थ का नेता कोई आकार भी होता है नहीं कोई आयतन होता है इसके अणु बहुत दूर दूर रहते है। और यह स्वतंत्र भी होते है। ये पदार्थ पात्र के अपना आकर और आयतन बदल तैरने की क्षमता होती है। इसमें तरल पदार्थ कहते है।

पदार्थ का रासायनिक वगीकरण

  1. शुद्ध पदार्थ
  2. अशुद्ध पदार्थ

शुद्ध पदार्थ  – शुद्ध पदार्थ वे कहलाते हैं जिनके एक ही प्रकार के घटक तथा अवयव होते हैं जैसे लोहा सोना जल आदि शुद्ध पदार्थ दो प्रकार के होते हैं तत्व एवं योगिक।

  1. तत्व – तत्व मौलिक पदार्थ होते हैं जिसे किसी भी भौतिक एवं रासायनिक विधि द्वारा नेट तो दो या दो से अधिक अन्य गुणों वाले पदार्थों में विभाजित किया जा सकता है और न ही दो या दो से अधिक पदार्थों के बीच सहयोग करके संश्लेषित किया जा सकता है दूसरे शब्दों में वह पदार्थ जो एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं तत्व कहलाते हैं।
  2.  योगिक – यौगिक वह शुद्ध पदार्थ है, जो दो या दो से अधिक तत्त्वों के निश्चित अनुपात मे रासायनिक संयोग से बनता है और जिसे उचित रासायनिक विधियों द्वारा दो या दो से अधिक सर्वथा गुणों वाले अवयवों (या अवयव तत्त्वों) मे विभक्त किया जा सकता है। उदाहरण:- जल एक यौगिक है

अशद्ध पदार्थ – ऐसे द्रव्य जिनमें एक या एक से अधिक प्रकार के घटक अवयव होते हो उन्हें शुद्ध पदार्थ कहते हैं जैसे शीतल पेय, मिट्टी, वायु आदि मिश्रण अशुद्ध पदार्थ हैं।

हमने padarth kise kahate hain लेख में आपको पदार्थ के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है  पदार्थ को समझाने की पूरी कोशिश की है अगर आपको हमारा यह लेख पसंद आया है तो हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बता सकते हैं और आपको किसी और बिंदु पर लेख चाहिए तो हमें कमेंट करके बता सकते हैं हम कोशिश करेंगे कि उस बिंदु पर जितनी जानकारी हो सब हम एकत्रित करकेआप तक पहुंच जाएं और आप हमारे इस लेख को पढ़कर खुश हो रहे हैं

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