Poem On Life In Hindi

जिंदगी पर कविताएँ – Poem On Life In Hindi

Poem On Life In Hindi दोस्तों आज हमने जिंदगी पर कविताएँ लिखी है जिंदगी का सफर केसे निकाल जाता है पता ही नहीं चलता जिंदगी को केसे जीना है हम यह सब बाते भूल जाते है इन कविताओं के माध्यम से हम ने ज़िन्दगी केसे जीनी चाहिए यह बताने की कोशिश की है.

जीवन हमें एक बार मिलता है यह ज़िन्दगी केसे जीनी है यह दूसरे क्यों तय करे आज हम अपनी ज़िंदगी तय करते हैं।

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Poem On Life In Hindi-जिंदगी पर कविताएँ

Best Poem on Life in Hindi

(1) मै” शिख
नहीं पा रहा हूं
मीठे झूठ बोलने का हुनर…
कड़वे सच ने मुझसे न जाने
कितने लोग छीन लिए…

(2) एक अजीब सी दौड़ है यह जिंदगी
जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं
और हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं।

(3) मिलता तो बहुत कुछ है इस जिंदगी में
बस हम गिनती उसी की करते हैं जो हासिल ना हो सका |

Life is a Book , Life Poem In Hindi

(1)   काश जिंदगी मेरी कोई किताब होती,
जिगर तुम्हारे पन्नों को फाड़ देती।

स्याही जिस कलम की इस्तेमाल होती,
उसका काच की शीशी को मैं उजाड़ देती।

सहारा क्यों दिया तुमने ,
जबकि खुद को मैं संभाल लेती।

हां गिरती कई बार, चुने मेरे रास्तों पर
लेकिन विश्वास है मुझे, खुद को मैं संभाल लेती।

जाकिर कर देते वह राज,
जो दिल में थे तुम्हारे।

सच कहती हूं ,
अपने जिक्र को भी,
तुम्हारे (जिंदगी की) किताब में टाल देती।

 Latest Hindi Poem on Zindagi

(1)   मंजिले भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था…
एक में अकेला था,काफिला भी उसका था…

साथ-साथ चलने की सोच भी उसकी थी,
फिर रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था…

आज क्यों अकेला हूं, दिल सवाल करता है…
लोग तो उसके थे ही क्या खुदा भी उसका था ?

(2)   जिंदगी एक रात है
जिसमें न जाने कितने ख्वाब है …
जो मिल गया वो अपना है
जो टूट गया हूं सपना है…

Life Is Race- Hindi Kavita On Life

जिंदगी की दौड़ में
तजुर्बा कच्चा ही रह गया…।
हम सीख ना पाए “फरेब”
और दिल बच्चा ही रह गया…।

बचपन में जहां चाहा हस लेते थे
जहां चाहा रो लेते थे…।
पर अब मुस्कान को तमीज चाहिए
और आसुओं को तनहाई…।

हम भी मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अंदाज से
देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में.

चलो मुस्कुराने की वजह ढूंढते हैं
जिंदगी तुम हमें ढूंढो हम तुम्हें ढूंढते हैं…

Life with friends- Hindi Poem

(1)  जिंदगी जख्मो से भरी है,
वक्त को मरहम बनाना सीख लो ,
हारना तो है एक दिन मौत से,
फिलहाल…
दोस्तों के साथ जिंदगी जीना सीख लो।

(2) अब ना मै हु,
ना बाकी है जमाने मेरे
फिर भी मशहूर है शहरों में फसाने मेरे
जिंदगी है तो नए जख्म भी लग जाएंगे
अब भी बाकी है कई दोस्त पुराने मेरे

 Bachpan-Poem On Life In Hindi

(1) काश मैं लौट जाऊं
बचपन की उन
हसी वादियों में …ए जिंदगी
जब ना कोई जरूरत थी
और ना ही कोई जरूरी था।

(2) कितनी खूबसूरत हुआ करते थे
बचपन के वो दिन
जिसमें दुश्मनी की वजह
सिर्फ एक कट्टी हुआ करती थी…
और सिर्फ दो उंगलियों जुड़ने से
दोस्ती फिर शुरू हुआ करती थीं…!

(3) आज बचपन का टूटा हुआ,
खिलौना मिला…
उसने मुझे तब भी रुलाया था,
उसने मुझे आज भी रुलाया है।

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